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आइची-नागोया एशियन गेम्स 2026 में भारतीय दल के अभियान ने खेल प्रेमियों और विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींचा है, जहाँ 24 सितंबर तक भारत ने कुल 17 पदक जीते हैं, लेकिन इनमें स्वर्ण पदक केवल एक ही है। भारत की वर्तमान पदक तालिका में 1 स्वर्ण, 7 रजत और 9 कांस्य पदक शामिल हैं।
चूँकि खेल अभी जारी हैं, इसलिए आने वाले दिनों में भारत की अंतिम पदक संख्या में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। इसके बावजूद, गोल्ड मेडल्स की धीमी रफ्तार एक बड़ा चर्चा का विषय बन गई है, विशेषकर तब जब भारत सरकार के खेल मंत्रालय ने पिछले तीन वर्षों में एथलीटों की तैयारियों पर ₹800 करोड़ से अधिक का भारी निवेश किया है।
साल 2023 के हांग्जो एशियाई खेलों में भारत के ऐतिहासिक प्रदर्शन (106 पदक) ने देश की उम्मीदों को काफी ऊँचा कर दिया था, जिसके चलते नागोया में शुरुआती दौर का यह मेडल पैटर्न काफी अहम माना जा रहा है।
24 सितंबर तक आइची-नागोया एशियाई खेलों में भारत की आधिकारिक पदक तालिका इस प्रकार है:
| पदक का प्रकार | संख्या |
|---|---|
| स्वर्ण पदक (Gold) | 1 |
| रजत पदक (Silver) | 7 |
| कांस्य पदक (Bronze) | 9 |
| कुल पदक (Total) | 17 |
भारतीय एथलीट अब तक 17 बार पोडियम तक पहुँच चुके हैं, लेकिन इनमें से केवल एक ही मुकाबला स्वर्ण पदक में तब्दील हो सका है।
यह आंकड़े दर्शाते हैं कि भारतीय खिलाड़ी कई स्पर्धाओं में फाइनल तक तो पहुँच रहे हैं, लेकिन अंतिम क्षणों में उस प्रदर्शन को पहले स्थान (Gold) में बदलने की चुनौती अभी भी बनी हुई है।
हालांकि, अंतिम रैंकिंग का सटीक आकलन अभी नहीं किया जा सकता क्योंकि कई प्रमुख स्पर्धाओं के मेडल राउंड अभी बाकी हैं।
पदक तालिका में भारत की वर्तमान स्थिति शीर्ष एशियाई खेल राष्ट्रों के मुकाबले अंतर को उजागर करती है।
चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश प्रतियोगिता के शुरुआती दिनों से ही बड़ी संख्या में स्वर्ण पदक बटोर रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय खेल नियमों के तहत किसी भी बहु-खेल प्रतियोगिता की आधिकारिक पदक तालिका में रैंकिंग का निर्धारण कुल पदकों के बजाय स्वर्ण पदकों की संख्या के आधार पर होता है। इसलिए 17 कुल पदक होने के बावजूद केवल 1 गोल्ड होने के कारण भारत ओवरऑल स्टैंडिंग्स में शीर्ष टीमों से काफी पीछे नजर आ रहा है।
2026 एशियाई खेलों के लिए भारत सरकार ने खिलाड़ियों की ट्रेनिंग और विदेशी दौरों पर रिकॉर्ड वित्तीय बजट आवंटित किया था।
पिछले तीन वर्षों में एनुअल कॉम्पिटिशन एंड ट्रेनिंग कैलेंडर (ACTC) के तहत लगभग ₹702.86 करोड़ खर्च किए गए। इसके अतिरिक्त, खेल मंत्रालय की प्रमुख टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) के माध्यम से ₹97.84 करोड़ का अतिरिक्त फंड मुहैया कराया गया।
दोनों को मिलाकर यह कुल निवेश लगभग ₹800.70 करोड़ बैठता है।
यह धनराशि एथलीटों की विश्वस्तरीय ट्रेनिंग, अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के अनुभव, आधुनिक खेल उपकरण, विदेशी कोचों और स्पोर्ट्स साइंस सपोर्ट पर खर्च की गई।
खेल मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, खिलाड़ियों की तैयारी से जुड़ा प्रमुख खर्च इस प्रकार विभाजित रहा:
यह भारी भरकम खर्च यह सुनिश्चित करने के लिए किया गया था कि भारतीय एथलीटों को वैश्विक स्तर की सुविधाएं मिलें। हालांकि, खेल जगत में भारी निवेश स्वतः पदकों की गारंटी नहीं देता, क्योंकि मैच के दिन का दबाव, फिटनेस, चोटें और परिस्थितियां परिणामों में निर्णायक भूमिका निभाती हैं।
हांग्जो एशियन गेम्स 2023 में भारत के रिकॉर्ड-तोड़ प्रदर्शन ने उम्मीदों का दायरा काफी बढ़ा दिया है:
हांग्जो में भारत ने कुल 106 पदक जीतकर इतिहास रचा था, जिसमें शामिल थे:
यह एशियाई खेलों में भारत का अब तक का सर्वकालिक सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था और देश ने पहली बार 100 पदकों का जादुई आंकड़ा पार कर तालिका में चौथा स्थान हासिल किया था।
उस ऐतिहासिक सफलता के बाद अब प्रशंसकों का ध्यान केवल कुल पदकों पर नहीं, बल्कि अधिक से अधिक स्वर्ण पदक जीतने पर केंद्रित हो चुका है।
नागोया में भारत को अब तक मिला एकमात्र स्वर्ण पदक भारतीय महिला क्रिकेट टीम की बदौलत आया है।
हरमनप्रीत कौर की अगुवाई वाली भारतीय महिला टीम ने फाइनल में श्रीलंका को 147 रनों के विशाल अंतर से रौंदकर अपना स्वर्ण पदक बरकरार रखा।
भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 216/3 का पहाड़ जैसा स्कोर बनाया और फिर श्रीलंका को महज 69 रनों पर ढेर कर दिया। इस धमाकेदार खिताबी जीत ने भारत को लगातार दूसरे एशियाई खेलों में महिला क्रिकेट का गोल्ड दिलाया और यही अब तक नागोया में भारत का शीर्ष पोडियम फिनिश रहा है।
भारत ने इस बार आइची-नागोया में 36 विभिन्न खेलों के लिए 501 एथलीटों (267 पुरुष और 234 महिला) का जत्था भेजा है, जिनके साथ 265 सपोर्ट स्टाफ सदस्य मौजूद हैं।
इस बड़े दल की सबसे अहम बात यह है कि इसमें 310 खिलाड़ी ऐसे हैं जो पहली बार एशियाई खेलों में पदार्पण (Debut) कर रहे हैं। यानी दल का लगभग 62% हिस्सा युवा और नए चेहरों से भरा हुआ है।
इतनी बड़ी संख्या में नए चेहरों की मौजूदगी यह दर्शाती है कि यह अभियान युवा एथलीटों को भविष्य के बड़े वैश्विक मंचों के लिए तैयार करने का भी एक अहम जरिया है।
भारत की मौजूदा पदक तालिका कुल पदकों से परे एक गंभीर खेल रणनीति की ओर इशारा करती है।
सवाल यह उठ रहा है कि ऐसे कितने खेल हैं जो लगातार पहले स्थान (Gold) पर फिनिश करने का माद्दा रखते हैं।
हांग्जो 2023 में भारत की रीढ़ एथलेटिक्स (29 पदक, 6 गोल्ड) और शूटिंग (22 पदक, 7 गोल्ड) बने थे। इन दोनों खेलों ने मिलकर भारत के कुल 28 में से 13 स्वर्ण पदक दिलाए थे। नागोया में भी ऐसे ही मजबूत खेलों में पोडियम के शीर्ष पर पहुँचने की निरंतरता बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती है।
हांग्जो और नागोया के आंकड़ों की सीधी तुलना करते समय यह समझना जरूरी है कि 2026 के खेल अभी अपने शुरुआती और मध्य चरण में हैं।
हांग्जो के 106 पदक पूरे 16 दिनों की प्रतियोगिता का अंतिम परिणाम थे, जबकि नागोया में 24 सितंबर तक केवल शुरुआती दिनों का लेखा-जोखा सामने आया है।
अभी एथलेटिक्स (ट्रैक एंड फील्ड), बॉक्सिंग, कुश्ती, तीरंदाजी, हॉकी और कबड्डी जैसे पदक बहुल खेलों के नॉकआउट और फाइनल मुकाबले बाकी हैं, जहाँ भारत की स्वर्ण पदकों की संख्या में तेजी से उछाल आ सकता है।
भारतीय दल का अभियान अभी समाप्त नहीं हुआ है और देश के पास शीर्ष पदकों की संख्या बढ़ाने के कई बड़े मौके मौजूद हैं:
एशियाई खेल केवल क्षेत्रीय वर्चस्व की लड़ाई नहीं हैं, बल्कि यह लॉस एंजेलिस 2028 ओलंपिक खेलों के लिए भारतीय एथलीटों की तैयारी का सबसे बड़ा रियलिटी चेक भी हैं।
नागोया में उभरते 310 नवोदित खिलाड़ियों का अनुभव भारत के दीर्घकालिक ओलंपिक विजन के लिए मील का पत्थर साबित होगा। यह नतीजे स्पष्ट करेंगे कि किन खेलों में हमारी बेंच स्ट्रेंथ मजबूत हुई है और कहाँ तत्काल तकनीकी सुधार की आवश्यकता है।
24 सितंबर तक भारत के नाम 17 पदक (1 स्वर्ण, 7 रजत और 9 कांस्य) दर्ज हैं। ₹800 करोड़ का बड़ा निवेश और 501 एथलीटों का दल यह साफ करता है कि देश में खेलों को लेकर संसाधनों की कोई कमी नहीं छोड़ी गई है।
खेल अभी पूरे शबाब पर हैं, इसलिए अंतिम परिणाम आना बाकी है। आने वाले दिनों में यह देखना सबसे दिलचस्प होगा कि रजत और कांस्य जीतने वाले भारतीय एथलीट फाइनल के दबाव को पार कर कितने मुकाबलों को गोल्ड मेडल में तब्दील कर पाते हैं।
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