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महाराष्ट्र की प्राचिती नागपुरकर ने एशियन गेम्स 2026 में एक मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (MMA) मुकाबले में रेफरी बनकर नया इतिहास रच दिया है। वे एशियाई खेलों में एमएमए मुकाबले को संचालित करने वाली पहली भारतीय बन गई हैं। प्राचिती ने एमएमए ऑफिशियल बनने के अपने सपने को पूरा करने के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंसी (CA) के अपने सफल करियर को अलविदा कह दिया था।
महाराष्ट्र की प्राचिती नागपुरकर ने एशियन गेम्स 2026 में भारतीय मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (MMA) के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर हासिल किया है। वे एशियाई खेलों के मंच पर किसी एमएमए मुकाबले में रेफरी की जिम्मेदारी निभाने वाली पहली भारतीय नागरिक बन गई हैं।
प्राचिती ने एमएमए के सेमीफाइनल मुकाबले में बतौर मुख्य रेफरी भूमिका निभाई और यह सुनिश्चित किया कि दोनों फाइटर्स के बीच मुकाबला नियमों और सुरक्षा मानकों के तहत खेला जाए।
उनकी यह उपलब्धि इसलिए भी खास और प्रेरणादायक है, क्योंकि उन्होंने कॉर्पोरेट जगत में चार्टर्ड अकाउंटेंसी (सीए) का एक बेहद सुरक्षित और आकर्षक करियर छोड़कर इस गैर-पारंपरिक राह को चुना।
प्राचिती पहले चार्टर्ड अकाउंटेंसी (CA) के क्षेत्र में अपना भविष्य संवार रही थीं। हालांकि, एमएमए और कॉम्बैट स्पोर्ट्स के प्रति उनके गहरे जुनून ने उन्हें अपने पेशेवर जीवन को पूरी तरह से बदलने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने साल 2022 में एमएमए की दुनिया में औपचारिक कदम रखा और बाद में एक पेशेवर रेफरी बनने के अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए सीए का पेशा छोड़ दिया। एक अच्छी सैलरी वाले सुरक्षित करियर को छोड़ने के बावजूद प्राचिती को अपने इस साहसिक फैसले पर कोई पछतावा नहीं है।
उनकी यह यात्रा दर्शाती है कि एमएमए के क्षेत्र में केवल फाइटर बनने तक ही संभावनाएं सीमित नहीं हैं, बल्कि ऑफिशियल और रेफरी के तौर पर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार करियर बनाया जा सकता है।
एमएमए में आने के बाद प्राचिती ने धीरे-धीरे मुकाबले संचालित करने का अनुभव हासिल किया और कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी पहचान बनाई।
अकाउंटेंसी की फाइलों से लेकर खेल के रिंग तक का उनका यह सफर खेल के प्रति उनके अटूट समर्पण का परिणाम है। रेफरी के कौशल को निखारने के साथ-साथ वे लगातार फाइटर्स को ट्रेनिंग देने में भी सक्रिय रहीं।
इसके अलावा प्राचिती मुंबई में एक जिम भी संचालित करती हैं, जहाँ वे युवाओं को एमएमए का बुनियादी और आधुनिक प्रशिक्षण देती हैं।
एशियन गेम्स में मिली इस ऐतिहासिक जिम्मेदारी से पहले प्राचिती कई बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में रेफरी और जज की भूमिका निभा चुकी हैं।
साल 2026 में उन्होंने एशियन गेम्स क्वालिफायर्स में ऑफिशियल के रूप में काम किया। इसके अलावा उन्होंने उज्बेकिस्तान और चीन में आयोजित एशियन चैंपियनशिप में भी मुकाबलों को संचालित किया था।
इन टूर्नामेंट्स के साथ-साथ प्राचिती साउथईस्ट एशियन गेम्स (SEA Games) में भी ऑफिशियल की जिम्मेदारी संभाल चुकी हैं। इन वैश्विक मंचों पर मिले अनुभव ने उन्हें एशियन गेम्स के दबाव भरे सेमीफाइनल मुकाबले में आत्मविश्वास से काम करने में मदद की।
एशियाई खेलों की एमएमए प्रतियोगिता में प्राचिती के अलावा दो अन्य भारतीय ऑफिशियल्स ने भी हिस्सा लिया।
हालांकि, वे दोनों भारतीय केवल जज (Judges) की भूमिका में थे, जबकि प्राचिती ने केज (अखाड़े) के भीतर उतरकर मुख्य रेफरी (Referee) की कमान संभाली। इसने उनके इस पद को भारतीय खेल इतिहास के लिए बेहद खास बना दिया।
उनकी यह उपलब्धि दर्शाती है कि वैश्विक स्तर पर अब भारतीय तकनीकी अधिकारियों और रेफरी की साख लगातार बढ़ रही है।
ऑफिशियल करियर के साथ-साथ प्राचिती जमीनी स्तर पर भी एमएमए के विस्तार में अपना योगदान दे रही हैं।
मुंबई में अपने ट्रेनिंग सेंटर के जरिए वे कई एथलीटों को एमएमए की ट्रेनिंग मुहैया कराती हैं। कोचिंग और अंपायरिंग दोनों का गहरा अनुभव होने के कारण वे इस खेल की हर तकनीकी बारीकी को बखूबी समझती हैं।
अपने इस काम के जरिए वे भारत में मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स के प्रति युवाओं को जागरूक करने और सकारात्मक माहौल बनाने का प्रयास कर रही हैं।
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एशियन गेम्स 2026 ने एमएमए को एक बड़ा बहु-खेल मंच प्रदान किया है, जहाँ भारतीय एथलीट सुचिका तारियाल ने कांस्य पदक (Bronze Medal) जीतकर देश के लिए इतिहास रचा।
एक तरफ सुचिका का पदक और दूसरी तरफ प्राचिती का रिंग में रेफरी बनना, यह दोनों उपलब्धियां भारत में एमएमए के प्रति लोगों का नजरिया बदलने में बेहद मददगार साबित होंगी।
एशियाई खेलों में एमएमए के शामिल होने से इस खेल को पूरे भारत में मुख्यधारा की पहचान मिलने की उम्मीद है। प्राचिती का मानना है कि इस खेल की बढ़ती लोकप्रियता से न केवल एथलीटों को फायदा होगा, बल्कि तकनीकी अधिकारियों के लिए भी रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।
उन्हें उम्मीद है कि आने वाले समय में भारत के कई और युवा एमएमए रेफरी और जज के रूप में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना करियर बनाने के लिए आगे आएंगे।
चार्टर्ड अकाउंटेंसी से एमएमए रेफरी बनने तक का प्राचिती नागपुरकर का यह सफर उनकी कड़ी मेहनत और सपनों के प्रति अडिग रहने का सटीक उदाहरण है।
एशियन गेम्स में पहली भारतीय एमएमए रेफरी बनकर उन्होंने साबित कर दिया है कि अगर लगन सच्ची हो, तो कॉम्बैट स्पोर्ट्स के केज के बाहर भी देश का तिरंगा शान से लहराया जा सकता है।
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