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नीरज चोपड़ा एशियन गेम्स 2026: दो बार के ओलंपिक पदक विजेता और स्टार भाला फेंक एथलीट नीरज चोपड़ा ने टखने के लिगामेंट की चोट (Ankle Ligament Injury) के चलते एशियन गेम्स 2026 से बाहर होने के बाद अपनी गहरी निराशा और दर्द साझा किया है। भारतीय जैवलिन स्टार से इस बार भी देश के लिए स्वर्ण पदक की सबसे बड़ी उम्मीद की जा रही थी, लेकिन अभ्यास के दौरान लगी चोट ने उन्हें इस बहुप्रतीक्षित महाद्वीपीय प्रतियोगिता से हटने पर मजबूर कर दिया।
जापान में एशियन गेम्स 2026 के आधिकारिक आगाज के बीच नीरज ने एक बेहद भावुक संदेश साझा किया, जिसमें उन्होंने अपने पुराने एशियाई खेलों के स्वर्णिम पलों, अपनी गंभीर चोट और इस बार तिरंगे का प्रतिनिधित्व न कर पाने की लाचारी पर खुलकर बात की है।
ट्रेनिंग सत्र के दौरान टखने के लिगामेंट में खिंचाव और चोट लगने के बाद नीरज चोपड़ा को एशियन गेम्स 2026 से अपना नाम वापस लेना पड़ा। अपनी शारीरिक स्थिति और रिकवरी का गहन आकलन करने के बाद उन्होंने फैसला किया कि इतने बड़े टूर्नामेंट में आधी-अधूरी फिटनेस के साथ उतरना सही कदम नहीं होगा।
यह फैसला भारतीय खेल प्रेमियों और खुद नीरज के लिए एक बहुत बड़ा झटका साबित हुआ, जिन्होंने पिछले दो एशियाई खेलों में लगातार स्वर्ण पदक अपने नाम किए थे।
नीरज ने 2018 के जकार्ता एशियाई खेलों में पहली बार स्वर्ण पदक जीता था और उसके बाद हांग्जो 2023 एशियन गेम्स में भी शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने गोल्ड मेडल का सफलतापूर्वक बचाव किया था। ऐसे में 2026 के संस्करण में उनकी अनुपस्थिति भारतीय एथलेटिक्स फैंस के बीच सबसे बड़ा चर्चा का विषय बनी हुई है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लिंक्डइन (LinkedIn) पर अपने दिल की बात साझा करते हुए नीरज ने बताया कि एक बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की जर्सी पहनना उनके लिए क्या मायने रखता है।
उन्होंने 2018 में अपने पहले एशियाई खेलों के उन पलों को याद किया, जब वे महज 20 साल के थे और उन्हें जकार्ता में भारतीय ध्वजवाहक बनने का गौरव प्राप्त हुआ था। उन्होंने वहाँ भाला फेंक स्पर्धा में ऐतिहासिक गोल्ड जीता, जो उनके शुरुआती करियर के सबसे यादगार पलों में दर्ज हो गया।
इसके पांच साल बाद उन्होंने हांग्जो में जोरदार वापसी करते हुए एक बार फिर अपने खिताब का बचाव किया और पोडियम पर शीर्ष स्थान हासिल किया।
लेकिन इस बार अनचाही चोट ने उन्हें 22 गज के रनवे पर दौड़ने और तिरंगा फहराने से रोक दिया।
नीरज ने स्वीकार किया कि एशियन गेम्स 2026 में भारत का प्रतिनिधित्व न कर पाना उनके लिए मानसिक रूप से बेहद कठिन है। उन्होंने कहा कि देश के लिए प्रतिस्पर्धा करना और 140 करोड़ देशवासियों की उम्मीदों का भार उठाना एक बहुत बड़ा सम्मान है, और इस सुनहरे मौके को हाथ से जाते देखना किसी भी खिलाड़ी के लिए अत्यंत पीड़ादायक होता है।
एशियाई खेल हमेशा से नीरज चोपड़ा के अंतरराष्ट्रीय करियर की सफलता की मजबूत बुनियाद रहे हैं।
साल 2018 के जकार्ता एशियाई खेलों में उन्होंने पुरुषों की भाला फेंक स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता। इस ऐतिहासिक थ्रो ने उन्हें भारतीय खेलों के सबसे बड़े सितारों की कतार में ला खड़ा किया था।
इसके बाद हांग्जो 2023 एशियाई खेलों में नीरज ने एक बार फिर अपना दबदबा साबित करते हुए लगातार दूसरा गोल्ड मेडल जीता और बैक-टू-बैक चैंपियन बने।
महाद्वीपीय स्तर पर उनके इसी बेमिसाल ट्रैक रिकॉर्ड की वजह से आइची-नागोया 2026 में भी उन पर सबकी निगाहें टिकी हुई थीं।
नीरज ने खेल में चोटों से निपटने के मानसिक और भावनात्मक पहलू पर भी खुलकर अपने विचार रखे।
उन्होंने समझाया कि चोटें किसी भी खिलाड़ी के जीवन का एक ऐसा कड़वा सच हैं जिनसे बचा नहीं जा सकता। कोई भी एथलीट यह तय नहीं कर सकता कि चोट कब लगेगी, लेकिन वह यह जरूर तय कर सकता है कि इस मुश्किल दौर में उसे कैसे सकारात्मक रुख बनाए रखना है।
इस भारतीय दिग्गज ने कहा कि उनके आसपास मौजूद करीबी लोगों और दोस्तों ने इस कठिन दौर में उन्हें मानसिक रूप से संभाले रखने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई है।
ओलंपिक पदक विजेता ने बताया कि विपरीत परिस्थितियों में सच्चे और सकारात्मक दोस्तों का साथ होना कितना जरूरी होता है।
नीरज ने कहा कि पेशेवर एथलीट ट्रेनिंग, यात्राओं और विदेशी टूर्नामेंट्स के चलते साल के अधिकांश समय अपने परिवार और घर से दूर रहते हैं। इसलिए ऐसे लोग साथ होना बेहद अहम है जो आपको जमीन से जोड़े रखें और माहौल को हल्का-फुल्का बनाए रखें।
उन्होंने खुलासा किया कि उनके कुछ करीबी दोस्त अच्छी तरह जानते हैं कि वे इस वक्त मानसिक और शारीरिक रूप से कठिन दौर से गुजर रहे हैं और बिल्कुल ठीक नहीं हैं, लेकिन वे बार-बार उनकी चोट या मैदान पर वापसी की तारीख को लेकर सवाल नहीं पूछते।
इसके बजाय, वे आम जिंदगी की बातें करते हैं, हंसी-मजाक करते हैं और खुलकर हंसते हैं। नीरज के अनुसार, ये बातें उन्हें यह याद दिलाती हैं कि जिंदगी सिर्फ अगली प्रतियोगिता या पदक तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इससे कहीं आगे और भी बहुत कुछ है।
भले ही नीरज चोपड़ा एशियन गेम्स 2026 के मैदान पर एक्शन में नजर नहीं आएंगे, लेकिन उन्होंने वादा किया है कि वे बाहर रहकर भारतीय दल के हर एक एथलीट का पूरा उत्साहवर्धन करेंगे।
उन्होंने कहा कि उन्हें प्रतियोगिता का हिस्सा न बन पाने की कमी जरूर खलेगी, लेकिन जकार्ता और हांग्जो में उन्होंने जो ऐतिहासिक यादें बनाई हैं, उनके लिए वे हमेशा आभारी रहेंगे।
फिलहाल नीरज का पूरा ध्यान अपने टखने के लिगामेंट की चोट से तेजी से उबरने और पूरी तरह फिट होकर सही समय पर प्रतिस्पर्धी एथलेटिक्स में वापसी करने पर टिका हुआ है।
नीरज चोपड़ा की पहली और सर्वोच्च प्राथमिकता अपने टखने की चोट का उचित इलाज और रिहैबिलिटेशन (Rehab) पूरा करना है। एशियन गेम्स से हटने का कड़ा फैसला उन्होंने अपनी दीर्घकालिक फिटनेस और करियर को ध्यान में रखकर ही लिया है।
जापान में आयोजित एशियन गेम्स 2026 में देश को अपने इस गोल्डन बॉय की कमी जरूर महसूस होगी, लेकिन करोड़ों भारतीय खेल प्रशंसक अब उनकी सेहत में सुधार और मैदान पर उनके अगले दमदार थ्रो का बेसब्री से इंतजार करेंगे।
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