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वेस्टइंडीज क्रिकेट इस समय एक गंभीर और गहरे वित्तीय संकट (Financial Crisis) के दौर से गुजर रहा है। बढ़ते खर्चों पर लगाम लगाने के लिए क्रिकेट वेस्टइंडीज (CWI) ने कई कड़े कॉस्ट-कटिंग (लागत कटौती) उपाय लागू किए हैं। बोर्ड ने अपने केंद्रीय अनुबंधित (सेंट्रल कॉन्ट्रैक्टेड) पुरुष और महिला खिलाड़ियों के वेतन में 25% की भारी कटौती कर दी है और इस साल के लिए दो प्रमुख घरेलू टूर्नामेंट्स को पूरी तरह स्थगित (सस्पेंड) कर दिया है।
यह चौंकाने वाला घटनाक्रम ठीक उस समय सामने आया है जब कैरेबियाई टीम भारत के दौरे (India vs West Indies Series) पर पहुँची है, जहाँ दोनों देशों के बीच 27 सितंबर से तीन मैचों की वनडे और पांच मैचों की टी20आई सीरीज खेली जानी है।
क्रिकेट वेस्टइंडीज ने नकदी प्रवाह (Cash-Flow) की भारी किल्लत और लगातार बढ़ते वित्तीय घाटे से निपटने के लिए अनुबंधित खिलाड़ियों के वेतन में 25% कटौती का कठोर निर्णय लिया है।
इसके अलावा बोर्ड ने घरेलू क्रिकेटरों के अनुबंध की अवधि को भी घटाकर केवल सात महीने कर दिया है। इन फैसलों का मुख्य उद्देश्य बोर्ड पर पड़ रहे तात्कालिक वित्तीय बोझ को कम करना और संस्था की वित्तीय स्थिरता को दोबारा पटरी पर लाना है।
हालांकि ये फैसले खिलाड़ियों के लिहाज से बेहद कड़े हैं, लेकिन बोर्ड का मानना है कि मौजूदा संकट से उबरने के लिए लागत पर नियंत्रण पाना बेहद जरूरी हो गया था।
इस आर्थिक तंगी की सीधी गाज वेस्टइंडीज के घरेलू क्रिकेट कैलेंडर पर भी गिरी है।
सीडब्ल्यूआई ने परिचालन लागत घटाने के उद्देश्य से इस साल मेंस सुपर50 (Men's Super50 Cup) और विमेंस टी20 ब्लेज (Women's T20 Blaze) टूर्नामेंट्स को स्थगित करने का फैसला किया है।
इन टूर्नामेंट्स के रद्द होने से घरेलू खिलाड़ियों को बड़ा झटका लगा है, जो प्रतिस्पर्धी क्रिकेट खेलने, राष्ट्रीय चयनकर्ताओं का ध्यान खींचने और मैच फीस के जरिए अपनी आजीविका चलाने के लिए पूरी तरह इन घरेलू प्रतियोगिताओं पर निर्भर रहते हैं।
क्रिकेट वेस्टइंडीज के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) क्रिस डेहरिंग ने संगठन के सामने खड़े इस संकट की पृष्ठभूमि पर खुलकर बात की है।
डेहरिंग ने स्वीकार किया कि सीडब्ल्यूआई वर्तमान में वित्तीय, ढांचागत विकास और खेल प्रतिस्पर्धा तीनों ही मोर्चों पर गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है। उन्होंने कहा कि सैलरी में कटौती और टूर्नामेंट्स का निलंबन आदर्श स्थिति नहीं है, लेकिन बोर्ड को दिवालिया होने से बचाने और आर्थिक संतुलन बनाए रखने के लिए ऐसे कड़े कदम उठाना अनिवार्य हो गया था।
बोर्ड अब अपनी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के साथ-साथ अनावश्यक खर्चों पर पूरी तरह नकेल कसने की रणनीति पर काम कर रहा है।
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सीईओ क्रिस डेहरिंग ने कैरेबियाई क्रिकेट की सबसे बड़ी वित्तीय समस्या के रूप में घरेलू हवाई यात्रा (Domestic Flight Travel) के भारी-भरकम खर्च को उजागर किया है।
डेहरिंग के अनुसार, वेस्टइंडीज क्रिकेट ने पिछले 15 वर्षों के दौरान केवल घरेलू उड़ानों और द्वीपों के बीच यात्रा पर लगभग $80 मिलियन (करीब ₹670 करोड़) फूंक दिए हैं।
उन्होंने यह भी खुलासा किया कि घरेलू यात्रा पर इतनी भारी रकम खर्च किए जाने के बावजूद बोर्ड को किसी भी एयरलाइन कंपनी से कोई स्पॉन्सरशिप या वित्तीय रियायत हासिल नहीं हुई, जिसने बोर्ड के खजाने को खाली करने में बड़ी भूमिका निभाई।
वेस्टइंडीज की भौगोलिक संरचना ऐसी है कि अलग-अलग द्वीपीय देशों (जमैका, बारबाडोस, त्रिनिदाद, गुयाना, एंटीगुआ आदि) के बीच टीमों, सपोर्ट स्टाफ और उपकरणों को ले जाने के लिए हवाई यात्रा ही एकमात्र विकल्प है।
होटल आवास और उड़ानों के लगातार बढ़ते किराए ने बोर्ड के बजट को पूरी तरह असंतुलित कर दिया। डेहरिंग ने स्पष्ट किया कि इन दीर्घकालिक लॉजिस्टिक्स खर्चों और मौजूदा कैश-फ्लो संकट के चलते अब मितव्ययिता बरतना मजबूरी बन गया है।
आगामी भारत बनाम वेस्टइंडीज व्हाइट-बॉल सीरीज क्रिकेट वेस्टइंडीज के लिए व्यावसायिक (Commercial) रूप से बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
इस दौरे पर तीन वनडे और पांच टी20आई मुकाबले खेले जाएंगे। भारतीय क्रिकेट टीम का बाजार वैश्विक क्रिकेट में सबसे बड़ा माना जाता है, जिससे मिलने वाले ब्रॉडकास्टिंग, स्पॉन्सरशिप और अन्य अधिकार कैरेबियाई बोर्ड को कुछ तात्कालिक राहत दे सकते हैं।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि सीडब्ल्यूआई की वित्तीय समस्याएं काफी गहरी और दीर्घकालिक हैं, इसलिए सिर्फ एक भारत दौरे की कमाई से बोर्ड के संपूर्ण आर्थिक संकट का स्थायी समाधान होना संभव नहीं है।
सैलरी में 25% की कटौती, घरेलू क्रिकेटरों के अनुबंध को सात महीने तक सीमित करना और सुपर50 कप जैसे प्रमुख टूर्नामेंट्स को रद्द करना यह साफ दर्शाता है कि दो बार की वनडे विश्व कप विजेता टीम का क्रिकेट बोर्ड इस समय अपने सबसे नाजुक दौर से गुजर रहा है।
ऐसे में जब वेस्टइंडीज की सीनियर टीम भारत की मजबूत टीम के खिलाफ मैदान पर उतरेगी, तो उनकी चुनौती न केवल 22 गज की पट्टी पर मैच जीतने की होगी, बल्कि अपने देश के क्रिकेट के अस्तित्व और सम्मान को बचाए रखने की भी होगी।
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