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एशियन गेम्स 2026: पिंकी बलहारा ने कुराश में ब्रॉन्ज जीत रचा इतिहास

chirag pic By - सोमवार, सितंबर 28, 2026
Last Updated on सितंबर 28, 2026 02:44 अपराह्न
एशियन गेम्स 2026: पिंकी बलहारा ने कुराश में ब्रॉन्ज जीत रचा इतिहास

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जापान के आइची-नागोया में चल रहे एशियन गेम्स 2026 में भारतीय दल का शानदार प्रदर्शन जारी है। भारत की अनुभवी कुराश (Kurash) एथलीट पिंकी बल्हारा (Pinky Balhara) ने महिलाओं के 78 किग्रा भार वर्ग में कांस्य पदक (Bronze Medal) जीतकर देश को गौरवान्वित किया है। हालांकि वे सेमीफाइनल मुकाबले में हार के बाद गोल्ड मेडल मैच में जगह बनाने से चूक गईं, लेकिन पिंकी ने इतिहास रचते हुए कुराश में दो एशियन गेम्स पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनने का गौरव हासिल कर लिया है।

सेमीफाइनल में पिंकी को दक्षिण कोरिया की सुमिन मो (Sumin Mo) के खिलाफ 0-5 से हार का सामना करना पड़ा। अंतिम-4 (सेमीफाइनल) में पहुँचते ही उनका पोडियम स्थान सुनिश्चित हो चुका था, जिसके चलते उन्होंने इस प्रतियोगिता का समापन कांस्य पदक के साथ किया।

पिंकी बल्हारा बनीं कुराश में दो एशियन गेम्स मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला

एशियन गेम्स 2026 में जीता गया यह कांस्य पदक पिंकी बल्हारा के करियर का एशियाई खेलों में दूसरा पदक है।

उनका पहला एशियन गेम्स पदक 2018 जकार्ता एशियाई खेलों में आया था, जहाँ उन्होंने महिलाओं के 52 किग्रा भार वर्ग में रजत पदक जीतकर सनसनी मचाई थी। ठीक आठ साल बाद, उन्होंने 52 किग्रा से छलांग लगाकर सीधे 78 किग्रा वर्ग में पोडियम पर अपनी जगह पक्की की।

एशियाई खेलों के दो अलग-अलग संस्करणों में पदक जीतकर पिंकी ने आधिकारिक तौर पर इतिहास के पन्नों में अपना नाम कुराश में दो एशियाई पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला एथलीट के रूप में दर्ज करा लिया है।

क्वार्टर फाइनल में जीत से ब्रॉन्ज तक: ऐसा रहा पिंकी का सफर

पिंकी को प्री-क्वार्टर फाइनल राउंड में बाई (Bye) मिला था, जिससे वे सीधे क्वार्टर फाइनल स्टेज में पहुँचीं।

क्वार्टर फाइनल में उनका सामना गारम लिन (Garam Lin) से हुआ, जहाँ उन्होंने तकनीकी श्रेष्ठता दिखाते हुए 3-0 से एकतरफा जीत दर्ज की। इस जीत ने सीधे सेमीफाइनल का टिकट कटाया और भारत की झोली में कुराश का पदक पक्का कर दिया।

गोल्ड मेडल मुकाबले में जगह बनाने के लिए उन्हें बस एक और जीत की दरकार थी, लेकिन सेमीफाइनल में दक्षिण कोरियाई प्रतिद्वंद्वी सुमिन मो ने उन्हें 0-5 से रोक दिया।

घुटने की चोट के बावजूद लड़ीं पिंकी बल्हारा

सेमीफाइनल मुकाबले के समापन के बाद पिंकी ने एक बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि क्वार्टर फाइनल मैच के दौरान उनके दाएं घुटने में गंभीर चोट (Knee Injury) लग गई थी।

दर्द और चोट के बावजूद उन्होंने मैट पर उतरने का हौसला नहीं छोड़ा। पिंकी के अनुसार, उनकी कोरियाई प्रतिद्वंद्वी को उनकी इस कमजोरी और चोट का अंदाजा हो गया था, जिसके चलते मुकाबले के दौरान बार-बार उसी चोटिल हिस्से को निशाना बनाया गया।

भारतीय एथलीट ने दर्द के बीच भी आक्रामक खेल जारी रखने का प्रयास किया, लेकिन घुटने की समस्या के कारण मूवमेंट सीमित हो गया और मुकाबला पेनल्टी के आधार पर कोरियाई खिलाड़ी के पक्ष में चला गया।

पिंकी ने यह भी स्पष्ट किया कि मई में उज्बेकिस्तान में आयोजित एशियन चैंपियनशिप 78 किग्रा वर्ग में उनकी केवल दूसरी ही प्रतियोगिता थी, जिससे नए भार वर्ग में यह मेडल और भी खास बन जाता है।

कौन हैं पिंकी बल्हारा? जानें दिल्ली से पोडियम तक की कहानी

पिंकी बल्हारा मूल रूप से दिल्ली के नेब सराय (Neb Sarai) की रहने वाली हैं और उन्होंने बेहद कम उम्र में ही कुराश का कड़ा अभ्यास शुरू कर दिया था।

पिंकी ने महज 9 साल की उम्र से इस पारंपरिक मार्शल आर्ट में हाथ आजमाना शुरू किया था। वे मुनीरका स्थित बाबा गंगा नाथ जूडो और कुराश एकेडमी में अभ्यास करती हैं, जिसे उनके मामा और जाने-माने कोच समुंदर टोकस (Samundar Tokas) संचालित करते हैं।

वर्षों की कड़ी तपस्या, अनुशासित ट्रेनिंग और घरेलू-अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट्स के अनुभव ने पिंकी को भारत की सबसे प्रमुख कुराश एथलीटों की कतार में ला खड़ा किया है।

पिंकी बल्हारा के एशियन गेम्स मेडल रिकॉर्ड:

  • 2018 जकार्ता एशियन गेम्स: महिलाओं के 52 किग्रा वर्ग में पदक
  • 2026 आइची-नागोया एशियन गेम्स: महिलाओं के 78 किग्रा वर्ग में कांस्य पदक
  • ऐतिहासिक कीर्तिमान: कुराश खेल में दो एशियाई खेल पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला

52 किग्रा से सीधे 78 किग्रा जैसे भारी वर्ग में आकर एशिया के सबसे बड़े खेल मंच पर पोडियम हासिल करना पिंकी के असाधारण लचीलेपन और तकनीकी ताकत को साबित करता है।

क्या है कुराश (Kurash)? जानें इस मार्शल आर्ट के नियम

कुराश मध्य एशिया (विशेषकर उज्बेकिस्तान) का एक प्राचीन और पारंपरिक मार्शल आर्ट खेल है, जो जूडो और कुश्ती के तत्वों से मिलता-जुलता है। इस खेल में दो खिलाड़ी अनुमति प्राप्त तकनीकों का इस्तेमाल करते हुए अपने प्रतिद्वंद्वी को मैट पर गिराने (थ्रो करने) का प्रयास करते हैं।

मुकाबले के दौरान एथलीट पारंपरिक रंगीन जैकेट (याकताक) पहनते हैं। खिलाड़ी द्वारा किए गए थ्रो की तकनीक और सटीकता के आधार पर अंक दिए जाते हैं। एक ऐसा थ्रो जो प्रतिद्वंद्वी को सीधे पीठ के बल जमीन पर गिरा दे (हलाल/खलाल), सबसे निर्णायक स्कोर माना जाता है और तत्काल जीत दिला सकता है।

मुकाबला समाप्त होने पर जिस खिलाड़ी के पास अधिक तकनीकी अंक या कम पेनल्टी होती है, उसे विजेता घोषित किया जाता है।

एशियन गेम्स 2026: भारतीय कुराश के इतिहास में अमर हुआ पिंकी का नाम

पिंकी बल्हारा का यह कांस्य पदक एशियन गेम्स 2026 में भारतीय मार्शल आर्ट्स के सफर का एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बन चुका है।

9 साल की नन्हीं उम्र से मैट पर पसीना बहाने से लेकर 2018 और 2026 के एशियाई खेलों में तिरंगा लहराने तक, पिंकी की कहानी संघर्ष और अदम्य साहस की मिसाल है। घुटने की चोट से लड़ते हुए जीता गया यह कांस्य पदक भारतीय खेल इतिहास में सदैव याद रखा जाएगा।

यह भी पढ़ें: एशियन गेम्स 2026: भारत ने ईरान को हराकर कबड्डी में जीता गोल्ड

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