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भारतीय सिनेमा के दिग्गज और तीन बार के राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेता नाना पाटेकर (Nana Patekar) के 75 वर्ष की आयु में हुए निधन की खबरों के बीच उनका एक साल पुराना बयान सोशल मीडिया पर फिर से चर्चा में आ गया है। भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट रिश्तों को लेकर हमेशा मुखर रहने वाले नाना पाटेकर का यह बयान एक बार फिर वायरल हो रहा है, जिसने दोनों देशों के बीच खेल संबंधों पर पुरानी बहस को ताजा कर दिया है।
नाना पाटेकर ने 14 सितंबर 2025 को पुणे में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान भारत-पाकिस्तान एशिया कप मुकाबले से ठीक पहले अपनी दो टूक राय रखी थी। उस समय उनके इस कड़े रुख ने पूरे देश का ध्यान खींचा था।
क्रिकेट मुकाबले पर बात करते हुए नाना पाटेकर ने बिना किसी लाग-लपेट के अपनी व्यक्तिगत राय साझा की थी। उन्होंने साफ तौर पर कहा था कि भारत को पाकिस्तान के साथ किसी भी सूरत में क्रिकेट नहीं खेलना चाहिए।
अभिनेता ने स्वीकार किया था कि शायद उन्हें इतने संवेदनशील मुद्दे पर सार्वजनिक टिप्पणी नहीं करनी चाहिए, लेकिन फिर भी उन्होंने अपनी भावनाएं स्पष्ट रखीं। देश के जवानों और निर्दोष नागरिकों की शहादत का हवाला देते हुए उन्होंने तीखा सवाल पूछा था:
"मुझे ऐसे मामलों पर शायद नहीं बोलना चाहिए, लेकिन मेरी निजी राय यही है कि भारत को पाकिस्तान के साथ नहीं खेलना चाहिए। जब हमारे लोगों का खून उनकी वजह से बहाया गया है, तो फिर हम उनके साथ मैदान पर क्यों खेलें?"
नाना पाटेकर का यह बयान उस समय सामने आया था जब पहलगाम आतंकी हमले और उसके बाद के तनाव के चलते दोनों देशों के रिश्तों में भारी खटास आ गई थी।
उस दौरान एशिया कप 2025 में भारत और पाकिस्तान के मैच को लेकर देश भर में भारी आक्रोश था। एक बड़ा वर्ग मैच के बहिष्कार की मांग कर रहा था, जबकि दूसरा वर्ग यह तर्क दे रहा था कि खेल को कूटनीति और राजनीति से अलग रखा जाना चाहिए। नाना पाटेकर के इस बयान ने बहिष्कार की मांग को उस समय बड़ी नैतिक ताकत दी थी।
उस समय बॉलीवुड अभिनेता सुनील शेट्टी ने इस मुद्दे पर थोड़ा अलग रुख अपनाया था। उन्होंने भारतीय क्रिकेटरों का बचाव करते हुए कहा था कि खिलाड़ी पेशेवर होते हैं और वे वैश्विक खेल संगठनों व अंतरराष्ट्रीय नियमों से बंधे होते हैं।
सुनील शेट्टी का कहना था कि मैच खेलना बोर्ड और आईसीसी के नियमों का हिस्सा है, लेकिन एक भारतीय नागरिक के तौर पर यह हर व्यक्ति का निजी फैसला है कि वह मैच देखना चाहता है या नहीं।
नाना पाटेकर का क्रिकेट से बेहद गहरा और पुराना नाता रहा है। वे केवल एक दर्शक नहीं थे, बल्कि बचपन में खुद क्रिकेट खेला करते थे और बेहतरीन ऑफ-स्पिन गेंदबाजी किया करते थे।
उम्र के हर पड़ाव पर उन्होंने भारतीय क्रिकेट को बेहद करीब से फॉलो किया और वे टीम इंडिया के मुकाबलों पर पैनी नजर रखते थे।
नाना पाटेकर पूर्व भारतीय कप्तान विराट कोहली के बहुत बड़े प्रशंसक थे। उन्होंने कई साक्षात्कारों में कोहली के खेल और उनके आक्रामक जज्बे की खुलकर तारीफ की थी।
नाना ने एक बार हल्के-फुल्के अंदाज में कहा था कि जब विराट कोहली मैदान पर सस्ते में आउट हो जाते हैं, तो उनका खाना खाने का मन तक नहीं करता। यह बात दर्शाती थी कि वे भारतीय क्रिकेट और विराट से दिल से कितना जुड़े हुए थे।
75 वर्ष की उम्र में उनके अचानक चले जाने से जहाँ पूरा कला जगत और उनके प्रशंसक गहरे शोक में हैं, वहीं देश और सेना के प्रति उनका अटूट प्रेम एक बार फिर याद किया जा रहा है।
उनका यह पुराना बयान आज भी प्रासंगिक बना हुआ है कि सीमाओं पर तनाव और शहादत के बीच क्या मैदान पर खेल का उत्सव मनाया जाना चाहिए? नाना पाटेकर भले ही हमारे बीच न रहे हों, लेकिन अपनी बेबाक आवाज, राष्ट्रभक्ति और स्पष्टवादिता के लिए वे हमेशा याद किए जाते रहेंगे।
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